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लोक-1 (गेहूँ बीज) – view 1 of 1
Wheat Seeds

लोक-1 (गेहूँ बीज)

88% अंकुरण
स्टॉक में

1981 में एआरएस विजापुर (गुजरात) से जारी की गई समय-परीक्षित रोटी गेहूँ की किस्म। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में व्यापक रूप से उगाई जाती है। जल्दी पकने वाली, सीमित सिंचाई में सूखा-सहनशील और चपाती हेतु उत्कृष्ट गुणवत्ता के बोल्ड अम्बर दानों के लिए जानी जाती है।

मुख्य विशेषताएं

  • 1981 में एआरएस विजापुर (GAU) से जारी — दशकों से सिद्ध किस्म
  • जल्दी पकने वाली (~105–110 दिन) — खेत जल्दी खाली, दोहरी फसल के लिए आदर्श
  • सूखा-सहनशील — 1–2 सिंचाइयों में भी विश्वसनीय उपज
  • सिंचित में 45–55 क्विं./हे., सीमित सिंचाई में 30–40 क्विं./हे.
  • बोल्ड चमकदार अम्बर दाने — आटा और घरेलू चपाती के लिए उत्तम
  • पौधे की ऊँचाई ~90–95 सेमी, मध्यम उर्वरता में लोडजिंग सहनशील
  • समय पर (नवम्बर प्रारम्भ) तथा देर से (मध्य दिसम्बर तक) बुवाई हेतु उपयुक्त
  • भूरे रतुआ और कर्नल बंट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोध
  • उच्च परीक्षण भार (~40–42 ग्राम/1000 दाने) एवं अच्छी आटा प्राप्ति
  • गुजरात, सौराष्ट्र, कच्छ, मप्र, महाराष्ट्र और राजस्थान के लिए उपयुक्त

खेती संબंधित जानकारी

खेती की स्थितियां

ठंडे, शुष्क रबी मौसम में (15–25°C) सर्वोत्तम। pH 6.5–7.5 की मध्यम से भारी काली अथवा जलोढ़ मिट्टी उपयुक्त। सीमित सिंचाई सहनशील; 3–4 सिंचाइयों से अच्छी उपज।

उत्पादन का अनुमान

समय पर बुवाई एवं पूर्ण सिंचाई पर 45–55 क्विं./हे.; सीमित (1–2) सिंचाई पर 30–40 क्विं./हे.। मध्य व पश्चिम भारत के वर्षा-आधारित क्षेत्रों में भी विश्वसनीय।

पैकेजिंग और उपयोग

बीज दर: लाइन बुवाई हेतु 100–125 किग्रा./हे.। मानक 20 किग्रा. बोरों में; माँग पर बल्क पैक उपलब्ध।

मुख्य बिंदु

मुख्य बिंदु

  • 1981 में एआरएस विजापुर (GAU) से जारी — दशकों से सिद्ध किस्म
  • जल्दी पकने वाली (~105–110 दिन) — खेत जल्दी खाली, दोहरी फसल के लिए आदर्श
  • सूखा-सहनशील — 1–2 सिंचाइयों में भी विश्वसनीय उपज
  • सिंचित में 45–55 क्विं./हे., सीमित सिंचाई में 30–40 क्विं./हे.
  • बोल्ड चमकदार अम्बर दाने — आटा और घरेलू चपाती के लिए उत्तम
  • पौधे की ऊँचाई ~90–95 सेमी, मध्यम उर्वरता में लोडजिंग सहनशील
  • समय पर (नवम्बर प्रारम्भ) तथा देर से (मध्य दिसम्बर तक) बुवाई हेतु उपयुक्त
  • भूरे रतुआ और कर्नल बंट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोध
  • उच्च परीक्षण भार (~40–42 ग्राम/1000 दाने) एवं अच्छी आटा प्राप्ति
  • गुजरात, सौराष्ट्र, कच्छ, मप्र, महाराष्ट्र और राजस्थान के लिए उपयुक्त

कृषि और प्रबंधन

मिट्टी

pH 6.5–7.5 वाली अच्छी जल-निकास युक्त मध्यम से भारी काली अथवा जलोढ़ दोमट मिट्टी। नई किस्मों की तुलना में सीमांत मिट्टी भी सहन करती है। जलजमाव अथवा अधिक खारी भूमि से बचें।

पानी और सिंचाई

महत्त्वपूर्ण सिंचाइयाँ: क्राउन रूट प्रारम्भ (20–25 DAS), कल्ले निकलना (40–45 DAS) तथा दाने भरना (80–85 DAS)। पूर्ण कार्यक्रम पर कुल 3–4 सिंचाइयाँ; अनुकूल वर्षा हो तो 1–2 सिंचाइयों में स्वीकार्य उपज।

बुवाई

तैयारी

दो क्रॉस जुताई के बाद हैरो व पाटा से बारीक, दृढ़ बीजबेड तैयार करें। भूमि तैयारी में 8–10 टन/हे. भली-भाँति सड़ी FYM दें।

बुवाई की गहराई

4–5 सेमी गहराई पर बुवाई; अधिक गहराई पर अंकुरण घटता है।

दूरी

सिंचित में लाइन बुवाई 20–22 सेमी; वर्षा/सीमित-सिंचाई में 22–25 सेमी।

बुवाई के तरीके
  • सीड ड्रिल से लाइन बुवाई (एकसमान स्टैंड हेतु प्राथमिकता)
  • छिड़काव के बाद हल्की हैरो (अधिक बीज-दर आवश्यक)
  • उपयुक्त मिट्टी में धान/कपास के बाद जीरो-टिलेज
बुवाई का समय
समय पर बुवाई: अधिकांश मैदानों में 1–20 नवम्बर देर से बुवाई: 21 नवम्बर – 15 दिसम्बर (125 किग्रा./हे. बीज दर) वर्षा-आधारित/सीमित सिंचाई: अवशेष नमी के अनुसार अक्टूबर अंत से
बीज दर

समय पर लाइन बुवाई हेतु 100 किग्रा./हे.; देर से अथवा छिड़काव हेतु 125 किग्रा./हे.

कटाई

दाने कठोर व पुआल सुनहरी-पीली होने पर कटाई (नमी 18–20%)। बिखराव की हानि से बचने हेतु अधिक पकने न दें। बड़े क्षेत्र में कंबाइन उपयुक्त।

कटाई के बाद की गतिविधियाँ

तत्काल थ्रेशिंग के बाद धान्य को सुरक्षित नमी (~12%) तक धूप में सुखाएँ। स्वच्छ, शुष्क पात्रों में भण्डारित करें; दीर्घ भण्डारण हेतु नीम-आधारित संरक्षक लगाएँ।

उर्वरक

सिंचित खेतों में 120:60:40 किग्रा. NPK/हे. (वर्षा-आधारित में 80:40:30)। पूर्ण P, K + आधा N बेसल; शेष आधा N प्रथम सिंचाई (CRI अवस्था) पर टॉप-ड्रेस। जिंक की कमी पर 25 किग्रा. ZnSO4/हे. बेसल।

खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के 1–2 दिन में पेंडामेथालिन 30 EC @ 3.3 ली./हे., 800–1000 ली. पानी में छिड़काव। 30–35 DAS पर 2,4-D सोडियम साल्ट @ 625 ग्राम, 600 ली. पानी में, चौड़ी-पत्ती खरपतवार हेतु। आवश्यकता पर 30–35 DAS पर हाथ-निराई।

कीट और रोग प्रबंधन

मुख्य रोग: भूरा रतुआ, कर्नल बंट, लूज स्मट। कार्बोक्सिन 75 WP @ 2.5 ग्राम/किग्रा. बीज उपचार से स्मट नियंत्रण। बूट अवस्था पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC @ 1 मिली/लि. छिड़काव से रतुआ। दीमक हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 EC @ 4 मिली/किग्रा. बीज उपचार।