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GW-173 (गेहूँ बीज) – view 1 of 1
Wheat Seeds

GW-173 (गेहूँ बीज)

92% अंकुरण
स्टॉक में

GW-173 (गुजरात गेहूँ 173) SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा 2002 में जारी की गई लोकप्रिय उच्च उपज देने वाली रोटी गेहूँ की किस्म। मध्य व पश्चिम भारत में समय पर सिंचित बुवाई हेतु अनुशंसित। बोल्ड अम्बर दाने, अच्छी चपाती गुणवत्ता और रतुआ के विरुद्ध सशक्त प्रतिरोध की विशेषता।

मुख्य विशेषताएं

  • 2002 में SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा जारी — मध्य व पश्चिम भारत में व्यापक रूप से अपनाई गई
  • समय पर पूर्ण सिंचाई के साथ 45–55 क्विं./हे. उपज
  • बोल्ड अम्बर दाने — चपाती व आटा हेतु पसंदीदा
  • परीक्षण भार ~40–42 ग्राम/1000 दाने, अच्छी आटा प्राप्ति
  • पौधे की ऊँचाई ~95–100 सेमी — मजबूत तना, मध्यम लोडजिंग सहनशीलता
  • पत्ती रतुआ (भूरा रतुआ) और तना रतुआ (काला रतुआ) के विरुद्ध प्रतिरोधी
  • कर्नल बंट व लूज स्मट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोधी
  • समय पर बुवाई पर इष्टतम पकाव ~115–120 दिन
  • गुजरात, मप्र, महाराष्ट्र व राजस्थान के मैदानों में अच्छा अनुकूलन
  • संतुलित NPK व समय पर महत्त्वपूर्ण सिंचाइयों पर अच्छी प्रतिक्रिया

खेती संબंधित जानकारी

खेती की स्थितियां

ठंडे रबी मौसम (15–25°C) में सर्वोत्तम; सुगठित मध्यम काली अथवा जलोढ़ मिट्टी उपयुक्त। पूर्ण उपज हेतु 4–5 सिंचाइयाँ आवश्यक।

उत्पादन का अनुमान

समय पर सिंचित बुवाई पर 45–55 क्विं./हे.; मध्य व पश्चिम भारत के मैदानों में अच्छे प्रबंधन के साथ विश्वसनीय।

पैकेजिंग और उपयोग

बीज दर: लाइन बुवाई हेतु 100–125 किग्रा./हे.। 20 किग्रा. बोरों में उपलब्ध; माँग पर प्रमाणित बीज।

मुख्य बिंदु

मुख्य बिंदु

  • 2002 में SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा जारी — मध्य व पश्चिम भारत में व्यापक रूप से अपनाई गई
  • समय पर पूर्ण सिंचाई के साथ 45–55 क्विं./हे. उपज
  • बोल्ड अम्बर दाने — चपाती व आटा हेतु पसंदीदा
  • परीक्षण भार ~40–42 ग्राम/1000 दाने, अच्छी आटा प्राप्ति
  • पौधे की ऊँचाई ~95–100 सेमी — मजबूत तना, मध्यम लोडजिंग सहनशीलता
  • पत्ती रतुआ (भूरा रतुआ) और तना रतुआ (काला रतुआ) के विरुद्ध प्रतिरोधी
  • कर्नल बंट व लूज स्मट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोधी
  • समय पर बुवाई पर इष्टतम पकाव ~115–120 दिन
  • गुजरात, मप्र, महाराष्ट्र व राजस्थान के मैदानों में अच्छा अनुकूलन
  • संतुलित NPK व समय पर महत्त्वपूर्ण सिंचाइयों पर अच्छी प्रतिक्रिया

कृषि और प्रबंधन

मिट्टी

pH 6.5–7.5 वाली अच्छी जल-निकास युक्त मध्यम काली अथवा जलोढ़ दोमट मिट्टी। अधिक खारी, सोडिक अथवा जलजमाव वाली भूमि से बचें।

पानी और सिंचाई

महत्त्वपूर्ण सिंचाइयाँ: CRI (20–25 DAS), कल्ले (40–45 DAS), पुष्पन (80–85 DAS) व दाने भरना (100–105 DAS)। पूर्ण उपज हेतु कुल 4–5 सिंचाइयाँ।

बुवाई

तैयारी

दो जुताई के बाद पाटा से बारीक, दृढ़ बीजबेड। भूमि तैयारी में 8–10 टन/हे. FYM दें।

बुवाई की गहराई

एकसमान अंकुरण हेतु 4–5 सेमी गहराई।

दूरी

लाइन बुवाई 20–22 सेमी कतार-दूरी।

बुवाई के तरीके
  • सीड ड्रिल से लाइन बुवाई (प्राथमिकता)
  • छिड़काव के बाद हैरो
  • उपयुक्त मिट्टी में चावल/कपास के बाद जीरो-टिलेज
बुवाई का समय
समय पर बुवाई: 1–20 नवम्बर (इष्टतम) देर से बुवाई: 21 नवम्बर – 10 दिसम्बर (125 किग्रा./हे.) मध्य दिसम्बर के बाद बुवाई न करें
बीज दर

समय पर लाइन बुवाई हेतु 100 किग्रा./हे.; देर से या छिड़काव हेतु 125 किग्रा./हे.

कटाई

दाने कठोर व पुआल सुनहरी-पीली होने पर शारीरिक पकाव पर कटाई। 18–20% नमी पर कंबाइन; बिखराव से बचने हेतु देर न करें।

कटाई के बाद की गतिविधियाँ

भण्डारण से पहले धान्य को ~12% नमी तक धूप में सुखाएँ। बोरीबंदी से पहले सफाई व ग्रेडिंग; दीर्घ भण्डारण हेतु नीम-आधारित संरक्षक।

उर्वरक

120:60:40 किग्रा. NPK/हे.। पूर्ण P, K + आधा N बेसल; शेष N प्रथम व द्वितीय सिंचाई पर। जिंक की कमी पर 25 किग्रा. ZnSO4/हे. बेसल। प्रोटीन वृद्धि हेतु शीर्ष अवस्था पर 2% यूरिया पर्णीय छिड़काव।

खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के 1–2 दिन में पेंडामेथालिन 30 EC @ 3.3 ली./हे. छिड़काव। 25–30 DAS पर सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 WG @ 25 ग्राम a.i./हे. फेलारिस माइनर हेतु। 30–35 DAS पर एक हाथ-निराई।

कीट और रोग प्रबंधन

मुख्य रोग: पत्ती रतुआ, तना रतुआ, कर्नल बंट। कार्बोक्सिन 75 WP @ 2.5 ग्राम/किग्रा. + टेबुकोनाज़ोल 2 DS @ 1.25 ग्राम/किग्रा. बीज उपचार। बूट/शीर्ष अवस्था पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC @ 1 मिली/लि. छिड़काव। माहू हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL @ 100 मिली/हे.।