
GW-173 (गेहूँ बीज)
GW-173 (गुजरात गेहूँ 173) SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा 2002 में जारी की गई लोकप्रिय उच्च उपज देने वाली रोटी गेहूँ की किस्म। मध्य व पश्चिम भारत में समय पर सिंचित बुवाई हेतु अनुशंसित। बोल्ड अम्बर दाने, अच्छी चपाती गुणवत्ता और रतुआ के विरुद्ध सशक्त प्रतिरोध की विशेषता।
मुख्य विशेषताएं
- 2002 में SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा जारी — मध्य व पश्चिम भारत में व्यापक रूप से अपनाई गई
- समय पर पूर्ण सिंचाई के साथ 45–55 क्विं./हे. उपज
- बोल्ड अम्बर दाने — चपाती व आटा हेतु पसंदीदा
- परीक्षण भार ~40–42 ग्राम/1000 दाने, अच्छी आटा प्राप्ति
- पौधे की ऊँचाई ~95–100 सेमी — मजबूत तना, मध्यम लोडजिंग सहनशीलता
- पत्ती रतुआ (भूरा रतुआ) और तना रतुआ (काला रतुआ) के विरुद्ध प्रतिरोधी
- कर्नल बंट व लूज स्मट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोधी
- समय पर बुवाई पर इष्टतम पकाव ~115–120 दिन
- गुजरात, मप्र, महाराष्ट्र व राजस्थान के मैदानों में अच्छा अनुकूलन
- संतुलित NPK व समय पर महत्त्वपूर्ण सिंचाइयों पर अच्छी प्रतिक्रिया
खेती संબंधित जानकारी
खेती की स्थितियां
ठंडे रबी मौसम (15–25°C) में सर्वोत्तम; सुगठित मध्यम काली अथवा जलोढ़ मिट्टी उपयुक्त। पूर्ण उपज हेतु 4–5 सिंचाइयाँ आवश्यक।
उत्पादन का अनुमान
समय पर सिंचित बुवाई पर 45–55 क्विं./हे.; मध्य व पश्चिम भारत के मैदानों में अच्छे प्रबंधन के साथ विश्वसनीय।
पैकेजिंग और उपयोग
बीज दर: लाइन बुवाई हेतु 100–125 किग्रा./हे.। 20 किग्रा. बोरों में उपलब्ध; माँग पर प्रमाणित बीज।
मुख्य बिंदु
मुख्य बिंदु
- 2002 में SDAU, सरदार कृषिनगर द्वारा जारी — मध्य व पश्चिम भारत में व्यापक रूप से अपनाई गई
- समय पर पूर्ण सिंचाई के साथ 45–55 क्विं./हे. उपज
- बोल्ड अम्बर दाने — चपाती व आटा हेतु पसंदीदा
- परीक्षण भार ~40–42 ग्राम/1000 दाने, अच्छी आटा प्राप्ति
- पौधे की ऊँचाई ~95–100 सेमी — मजबूत तना, मध्यम लोडजिंग सहनशीलता
- पत्ती रतुआ (भूरा रतुआ) और तना रतुआ (काला रतुआ) के विरुद्ध प्रतिरोधी
- कर्नल बंट व लूज स्मट के विरुद्ध मध्यम प्रतिरोधी
- समय पर बुवाई पर इष्टतम पकाव ~115–120 दिन
- गुजरात, मप्र, महाराष्ट्र व राजस्थान के मैदानों में अच्छा अनुकूलन
- संतुलित NPK व समय पर महत्त्वपूर्ण सिंचाइयों पर अच्छी प्रतिक्रिया
कृषि और प्रबंधन
मिट्टी
pH 6.5–7.5 वाली अच्छी जल-निकास युक्त मध्यम काली अथवा जलोढ़ दोमट मिट्टी। अधिक खारी, सोडिक अथवा जलजमाव वाली भूमि से बचें।
पानी और सिंचाई
महत्त्वपूर्ण सिंचाइयाँ: CRI (20–25 DAS), कल्ले (40–45 DAS), पुष्पन (80–85 DAS) व दाने भरना (100–105 DAS)। पूर्ण उपज हेतु कुल 4–5 सिंचाइयाँ।
बुवाई
तैयारी
दो जुताई के बाद पाटा से बारीक, दृढ़ बीजबेड। भूमि तैयारी में 8–10 टन/हे. FYM दें।
बुवाई की गहराई
एकसमान अंकुरण हेतु 4–5 सेमी गहराई।
दूरी
लाइन बुवाई 20–22 सेमी कतार-दूरी।
बुवाई के तरीके
- •सीड ड्रिल से लाइन बुवाई (प्राथमिकता)
- •छिड़काव के बाद हैरो
- •उपयुक्त मिट्टी में चावल/कपास के बाद जीरो-टिलेज
बुवाई का समय
बीज दर
समय पर लाइन बुवाई हेतु 100 किग्रा./हे.; देर से या छिड़काव हेतु 125 किग्रा./हे.
कटाई
दाने कठोर व पुआल सुनहरी-पीली होने पर शारीरिक पकाव पर कटाई। 18–20% नमी पर कंबाइन; बिखराव से बचने हेतु देर न करें।
कटाई के बाद की गतिविधियाँ
भण्डारण से पहले धान्य को ~12% नमी तक धूप में सुखाएँ। बोरीबंदी से पहले सफाई व ग्रेडिंग; दीर्घ भण्डारण हेतु नीम-आधारित संरक्षक।
उर्वरक
120:60:40 किग्रा. NPK/हे.। पूर्ण P, K + आधा N बेसल; शेष N प्रथम व द्वितीय सिंचाई पर। जिंक की कमी पर 25 किग्रा. ZnSO4/हे. बेसल। प्रोटीन वृद्धि हेतु शीर्ष अवस्था पर 2% यूरिया पर्णीय छिड़काव।
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के 1–2 दिन में पेंडामेथालिन 30 EC @ 3.3 ली./हे. छिड़काव। 25–30 DAS पर सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 WG @ 25 ग्राम a.i./हे. फेलारिस माइनर हेतु। 30–35 DAS पर एक हाथ-निराई।
कीट और रोग प्रबंधन
मुख्य रोग: पत्ती रतुआ, तना रतुआ, कर्नल बंट। कार्बोक्सिन 75 WP @ 2.5 ग्राम/किग्रा. + टेबुकोनाज़ोल 2 DS @ 1.25 ग्राम/किग्रा. बीज उपचार। बूट/शीर्ष अवस्था पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC @ 1 मिली/लि. छिड़काव। माहू हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL @ 100 मिली/हे.।

